भाबी जी घर पर हैं: ‘अंगूठी’ को बेचने निकलें ‘विभूति’ और ‘डेविड चाचा’, कौन बनेगा बेवकूफ?

भाबी जी घर पर हैं (Bhabi Ji Ghar Par Hai) टीवी का फेमस सीरियल है. जिसका हर एक एपिसोड आपके लिए हंसी के फुव्वारे लेकर आता है. ‘भाबी जी घर पर हैं’ के किरदार  विभूति नारायण यानी आशिफ शेख (Aasif Sheikh), तिवारी जी यानी रोहिताश्व गौड (Rohitashv Gour), ‘अंगूरी भाबी’ शुभांगी अत्रे (Shubhangi Atre) ने लोगों के दिलों में खास जगह बना ली है. भाबी जी घर पर हैं के 1 मार्च के एपिसोड में क्या होने वाला है. यहां पढ़िए…

आज के एपिसोड की शुरुआत होती है तिवारी अंगूरी को फोन करता है और उसे जल्दी से खाना लाने के लिए कहता है. अंगूरी कहती है कि अभी थोड़ा और वक्त लगेगा. तिवारी बहुत गुस्सा दिखाते हैं. इस पर अंगूरी पूछती है कि क्या दिक्कत है, तिवारी कहते हैं बहुत भूख लगी है. तभी एक बच्चा अंगूरी के रसोई में जाकर दाल में बहुत सारे नमक डाल देता है. वही दाल अंगूरी तिवारी जी को खाने में परोस देती हैं. तिवारी जी जैसे ही दाल खाते हैं तुरंत मुंह से उगल देते हैं. और गुस्से में अंगूरी को डांटते हैं.

उधर डेविड विभूति से कहते इस अंगूठी से सब कुछ अच्छा होगा. तिवारी पूछता है फिर मैं पिट क्यों गया. डेविड समझाता है कि ऐसा हो जाता है कभी-कभी. तभी डेविड को उसके वकील का फोन आता है और कहता है कि आप केस हार रहे हैं. डेविड तुरंत विभू से अंगूठी निकालने के लिए कहता है.

उधर अंगूरी फोन पर बातें कर रही होती है, तभी वही लड़का फिर से किचन में जाता है और दाल -सब्जी में मिर्च पाउडर भरकर डाल देता है. तभी विभूति अंगूरी के पास आता है और उनको नमस्कार करता है. अंगूरी कहती हैं मैं छोले पूरी बना रही हूं. तिवारी जी कहते हैं मुझे पसंद हैं. अंगूरी विभूति जी को कटोरी में छोले देती हैं. विभूति जैसे ही छोले खाता है वैसे ही उसका मुंह में आग निकलने लगता है. तभी सक्सेना जी वहां से गुजरते हैं और अंधविश्वास भगाओ का नारा लगाते हैं. विभूति चुपचाप वापस चला जाता है.

उधर टिका, मलखान और टिल्लू तिवारी को अंगूठी के बारे में बताते हैं. तिवारी कहते हैं मैं इन सब बातों पर विश्ववास नहीं करता हूं. टिका बोलता है कि लेकिन आपके पिताजी करते हैं. सभी तिवारी का मजाक उड़ाते हैं. विभूति अपनी अंगूठी उतारने की कोशिश करता है, डेविड आरी लेकर आता है और कहता है उंगूली काट देते हैं. लेकिन विभूति अंगूठी को जोर से खींचता है वो बाहर आ जाती है. डेविड बोलता है कि इसे बेच देते हैं. विभूति कहता है कैसे, डेविड चाचा बोलते हैं किसी को बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं.

विभुति अंगूरी के पास जाता है, जब वह आरती कर रही होती हैं. विभु उनकी भक्ति के लिए अंगूरी की प्रशंसा करते हैं और कहते हैं कि तिवारी भाग्यशाली है कि आपके जैसी पत्नी है, अंगूरी कहती है कि मैं भी हूं, उसे पति के रूप में रखने के लिए, विभु कहते हैं कि मैं सहमत नहीं हूं, आपके बुरे कर्म उसके कारण हैं. अंगूरी कहती है कि चुप रहिए मैंने उनसे शादी करने की प्रार्थना की थी.प्री कैप: अंगूरी ने तिवारी, पंडित रामपाल को नीलम की अंगूठी पहनने के लिए कहा। विभु और डेविड सुनते हैं, भेष बदलकर तिवारी को अंगूठी बेचते हैं.

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